आगोश

#कैसे_कहूँ उनसे नजरे बचाकर
उनके ख़्यालो के #आगोश मे रहने लगे है
दामन भी भीगोते है चुपचाप रहकर
#कैसे_कहूॅ  दर्द अपने
ज़ज्बात भी सिसकने लगे है
यादो के #आगोश से  निकलते है जब भी
जमाने के  साथ वो भी बेगाने से  लगते ...!!

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