मसरूफ
बहुत मसरूफ रहे जमाने के रस्मो-रिवाजो मे
कभी दुआओ मे बसर की
#मुफ्त मे कभी बदुआओ को भी झेला है
हर मौसम पे गुमां रहा मोहब्बत का
कीमत समझा हमदोनों ने चाहत की...फिर
लौट आये पतझड जीवन मे साथ रहने को...!!
#बज़्म #सरस #परख #नारीशक्ति #शब्द_शाल #वीणा_की_तान
#शबनम 🌸✍ https://t.co/v8rJUJM0wc
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