मर्यादा

🌸#मर्यादा है जो लब कुछ नहीं कहते 
अश्क है की हर #मर्यादा को समेट ...
कभी कभी छलकते  है निगाहो  से..
हमारी चाहत भी अज़ीब #संदेह मे 
बसर होती है.....!!
#सरस #वीणा_काव्य_ग्रूप #बज़्म #शब्द_शाला 
#शबनम 🌸✍ https://t.co/2SoED3wys4

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