रूह

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 वो रूह की तसकीन है जानते हैं हम 
उनकी दीदार की ख़ातिर मुंतजिर थी निगाहें 
         और  उनका एक 
  न आने का पैग़ाम,हमारी रूह! ले गयी......!!
          शबनम  ✍💐🍁🍁🍁

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